
पढिये किन बडे अहम ऐलानो को दी मंजूरी
मंत्रीमंडल द्वारा बुजुर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों और आश्रित बच्चों को 1500 रुपए पैंशन के अलावा एक बार के लिए 1000 रुपए देने की मंजूरी
कोविड-19 महामारी के दरमियान मुश्किलें घटाने के लिए लिया फैसला
चंडीगढ, 6 जनवरी (विश्ववार्ता) मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने आज अहम फैसला लेते हुये बुजुर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं, आश्रित बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों को कोविड-19 महामारी के चलते पेश मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए 1500 रुपए प्रति महीना पैंशन/वित्तीय सहायता के अलावा उनको सिर्फ एक बार के लिए 1000 रुपए प्रति लाभार्थी तुरंत देने का फैसला किया गया है। यह अदायगी डी.बी.टी. के द्वारा सीधे तौर पर लाभार्थियों के बैंक खातों में डाली जायेगी। इससे लाभार्थियों को राहत मिलेगी और अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए मदद मिलेगी। एक बार के लिए यह वित्तीय लाभ देने से 27.71 लाख लाभार्थियों को लाभ होगा और सरकारी खजाने पर 277.13 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।
गुरू रविदास वाणी अध्ययन केंद्र कमेटी, डेरा सचखंड बलां को 25 करोड़ रुपए जारी करने की मंजूरी
मंत्रीमंडल ने गुरू रविदास वाणी अध्ययन केंद्र कमेटी, डेरा सचखंड बलां को योजनाबंदी विभाग के 25 अगस्त, 2021 को जारी दिशा-निर्देशों में ढील देते हुए पंजाब निर्माण प्रोग्राम के अधीन 31 दिसंबर, 2021 को जालंधर जिले के लिए विशेष केस के तौर पर एक बार के लिए योजनाबंदी विभाग की तरफ से पहले ही जारी की जा चुकी 25 करोड़ रुपए जारी करने की मंजूरी दे दी है।
यह बताने योग्य है कि मुख्यमंत्री ने यह ग्रांट गुरू रविदास वाणी अध्ययन केंद्र कमेटी, डेरा सचखंड बलां को देने का ऐलान किया था जिसको हाल ही में 28 दिसंबर, 2021 को आदरणीय 108 संत निरंजन दास जी (बाबा बलां वाले) के नेतृत्व में गठित किया गया था।
पंजाब सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता नियम, 2022 को मंजूरी
मंत्रीमंडल ने पंजाब सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता नियम, 2022 को हरी झंडी दे दी है। यह नियम कुशलता, आर्थिकता, ईमानदारी और जवाबदेही, पारदर्शिता, बोलीकारों के साथ निष्पक्ष और समानता वाला व्यवहार, सुशासन के बारे लोगों के भरोसे से समय पर निश्चित नतीजें प्रदान करने को यकीनी बनाने के लिए सृजत किये गए हैं।
मंत्रिमंडल द्वारा प्रस्तावित ‘पंजाब राज्य अनुसूचित जातियों का विकास एवं कल्याण’ (योजना, निर्धारण और वित्तीय संसाधनों का उपयोग) उप-आवंटन अध्यादेश-2022 की रूप-रेखा को मंज़ूरी
चंडीगढ़, अनुसूचित जाति सब प्लान प्रभावी ढंग से तैयार कर लागू किए जाने को सुनिश्चित बनाने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित ‘पंजाब राज्य अनुसूचित जातियों का विकास एवं कल्याण’ (योजना, निर्धारण और वित्तीय संसाधनों का उपयोग) उप-आवंटन अध्यादेश-2022 की रूप-रेखा को मंज़ूरी दे दी है।
इस बारे में फ़ैसला पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में आज शाम यहाँ पंजाब भवन में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।
नया कानून अनुसूचित जातियों सब प्लान (एस.सी.एस.पी.) को हरेक स्तर पर लागू करने सम्बन्धी पारदर्शिता और जि़म्मेदारी को सुनिश्चित बनाएगा और सराहनीय प्रदर्शन के लिए उत्साह बढ़ाने की व्यवस्था भी होगी। इसके अलावा एस.सी.एस.पी. को लागू करने वाला विभाग सब प्लान को सच्ची भावना से लागू करने के लिए जि़म्मेदार हो जाएगा, जिससे इसका लाभ सभी हिस्सेदारों जैसे कि राज्य की समूची अनुसूचित जातियों की आबादी को मिल सके।
मंत्रिमंडल ने कानूनी सलाहकार द्वारा तैयार और सत्यापित किए गए अध्यादेश के मसौदे को मंत्रालय के सामने दोबारा पेश करने की बजाय स्वीकृत करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
पंजाब राज्य में अनुसूचित जातियों की आबादी की प्रतिशतता 31.94 प्रतिशत है, जो सभी राज्यों की अपेक्षा अधिक है। पंजाब सरकार राज्य में अनुसूचित जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसूचित जातियों के विकास के लिए अनुसूचित जातियां सब प्लान के अधीन विभिन्न विभागों द्वारा बहुत सी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन योजनाओं को असरदार ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक्ट बनाने का फ़ैसला किया गया है। इस सम्बन्ध में एक अध्यादेश पंजाब के राज्यपाल को मंज़ूरी हेतु पेश किया जाएगा। इस एक्ट के अनुसार राज्य के बजट से अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की प्रतिशतता के बराबर की राशि अनुसूचित जातियों के विकास के लिए निर्धारित की जाएगी। एक्ट का लाभ राज्य में एस.सी.एस.पी. की बनावट और लागूकरण के सभी पहलुओं से विधिपूर्वक और व्यापक ढंग से तैयार करने की जुगतबंदी करना होगा।
पंजीकृत निर्माण श्रमिक को अंतरिम वित्तीय राहत के तौर पर हरेक पंजीकृत निर्माण श्रमिक को 3-3 हज़ार रुपए देने की मंज़ूरी
मंत्रिमंडल ने अंतरिम वित्तीय राहत के तौर पर पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रकशन वर्कर्स वैलफेयर बोर्ड (बी.ओ.सी.डब्ल्यू.) के साथ रजिस्टर्ड प्रति लाइव रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिक को 3000 रुपए जारी करने और बाँटने को मंज़ूरी दे दी है।
कोविड-19 के कारण पैदा हुई चुनौतीपूर्ण स्थिति के मद्देनजऱ कई स्थानों पर चल रहे निर्माण प्रोजेक्टों की प्रगति या तो रुक गई है या अस्थाई तौर पर धीमी पड़ गई है, जिससे राज्य भर में निर्माण कार्यों की रोज़ाना की गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। नतीजे के तौर पर, बहुत से निर्माण श्रमिकों की रोज़ी-रोटी भी प्रभावित हुई है। निर्माण श्रमिक अभी भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा तीसरी लहर के संभावित खतरे को देखते हुए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
जि़क्रयोग्य है कि प्रचलित स्थिति ने पहले ही काम-काजी माहौल को और बिगाड़ दिया है और समाज के पिछड़े वर्गों ख़ास तौर पर पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए श्रम के अवसरों को घटा दिया है, जिस कारण उनको गंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टरों के 2000 पद सृजन करने की मंज़ूरी
राज्य के बेरोजग़ार युवाओं को रोजग़ार के मौके प्रदान करने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की अच्छी सेहत को सुनिश्चित बनाने के मद्देनजऱ पंजाब मंत्रिमंडल ने आज स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती विंग डायरैक्टोरेट द्वारा 29200 रुपए प्रति माह वेतन मैट्रिक्स के साथ फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पी.टी.आई.) के 2000 पद सृजन करने की मंज़ूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इन नए सृजन किए गए पदों को भरने की प्रक्रिया पड़ाववार ढंग से शुरू की जाएगी। इसके अलावा उपरोक्त पदों की सृजन करने के लिए सालाना 70.08 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ेगा। इन नई नियुक्तियों को उनके तीन सालों के परखकाल के दौरान लागू वेतन मैट्रिक्स का न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाना है, इसके लिए पहले तीन सालों के लिए 210.24 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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चंडीगढ़, अनुसूचित जाति सब प्लान प्रभावी ढंग से तैयार कर लागू किए जाने को सुनिश्चित बनाने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित ‘पंजाब राज्य अनुसूचित जातियों का विकास एवं कल्याण’ (योजना, निर्धारण और वित्तीय संसाधनों का उपयोग) उप-आवंटन अध्यादेश-2022 की रूप-रेखा को मंज़ूरी दे दी है।
इस बारे में फ़ैसला पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में आज शाम यहाँ पंजाब भवन में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।
नया कानून अनुसूचित जातियों सब प्लान (एस.सी.एस.पी.) को हरेक स्तर पर लागू करने सम्बन्धी पारदर्शिता और जि़म्मेदारी को सुनिश्चित बनाएगा और सराहनीय प्रदर्शन के लिए उत्साह बढ़ाने की व्यवस्था भी होगी। इसके अलावा एस.सी.एस.पी. को लागू करने वाला विभाग सब प्लान को सच्ची भावना से लागू करने के लिए जि़म्मेदार हो जाएगा, जिससे इसका लाभ सभी हिस्सेदारों जैसे कि राज्य की समूची अनुसूचित जातियों की आबादी को मिल सके।
मंत्रिमंडल ने कानूनी सलाहकार द्वारा तैयार और सत्यापित किए गए अध्यादेश के मसौदे को मंत्रालय के सामने दोबारा पेश करने की बजाय स्वीकृत करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
पंजाब राज्य में अनुसूचित जातियों की आबादी की प्रतिशतता 31.94 प्रतिशत है, जो सभी राज्यों की अपेक्षा अधिक है। पंजाब सरकार राज्य में अनुसूचित जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसूचित जातियों के विकास के लिए अनुसूचित जातियां सब प्लान के अधीन विभिन्न विभागों द्वारा बहुत सी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि इन योजनाओं को असरदार ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक्ट बनाने का फ़ैसला किया गया है। इस सम्बन्ध में एक अध्यादेश पंजाब के राज्यपाल को मंज़ूरी हेतु पेश किया जाएगा। इस एक्ट के अनुसार राज्य के बजट से अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की प्रतिशतता के बराबर की राशि अनुसूचित जातियों के विकास के लिए निर्धारित की जाएगी। एक्ट का लाभ राज्य में एस.सी.एस.पी. की बनावट और लागूकरण के सभी पहलुओं से विधिपूर्वक और व्यापक ढंग से तैयार करने की जुगतबंदी करना होगा।
पंजीकृत निर्माण श्रमिक को अंतरिम वित्तीय राहत के तौर पर हरेक पंजीकृत निर्माण श्रमिक को 3-3 हज़ार रुपए देने की मंज़ूरी
मंत्रिमंडल ने अंतरिम वित्तीय राहत के तौर पर पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रकशन वर्कर्स वैलफेयर बोर्ड (बी.ओ.सी.डब्ल्यू.) के साथ रजिस्टर्ड प्रति लाइव रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिक को 3000 रुपए जारी करने और बाँटने को मंज़ूरी दे दी है।
कोविड-19 के कारण पैदा हुई चुनौतीपूर्ण स्थिति के मद्देनजऱ कई स्थानों पर चल रहे निर्माण प्रोजेक्टों की प्रगति या तो रुक गई है या अस्थाई तौर पर धीमी पड़ गई है, जिससे राज्य भर में निर्माण कार्यों की रोज़ाना की गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। नतीजे के तौर पर, बहुत से निर्माण श्रमिकों की रोज़ी-रोटी भी प्रभावित हुई है। निर्माण श्रमिक अभी भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा तीसरी लहर के संभावित खतरे को देखते हुए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
जि़क्रयोग्य है कि प्रचलित स्थिति ने पहले ही काम-काजी माहौल को और बिगाड़ दिया है और समाज के पिछड़े वर्गों ख़ास तौर पर पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए श्रम के अवसरों को घटा दिया है, जिस कारण उनको गंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टरों के 2000 पद सृजन करने की मंज़ूरी
राज्य के बेरोजग़ार युवाओं को रोजग़ार के मौके प्रदान करने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की अच्छी सेहत को सुनिश्चित बनाने के मद्देनजऱ पंजाब मंत्रिमंडल ने आज स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती विंग डायरैक्टोरेट द्वारा 29200 रुपए प्रति माह वेतन मैट्रिक्स के साथ फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पी.टी.आई.) के 2000 पद सृजन करने की मंज़ूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इन नए सृजन किए गए पदों को भरने की प्रक्रिया पड़ाववार ढंग से शुरू की जाएगी। इसके अलावा उपरोक्त पदों की सृजन करने के लिए सालाना 70.08 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ेगा। इन नई नियुक्तियों को उनके तीन सालों के परखकाल के दौरान लागू वेतन मैट्रिक्स का न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाना है, इसके लिए पहले तीन सालों के लिए 210.24 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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मुख्य मंत्री ने राज्य की 457 पंजीकृत गौशालाओं को 23 करोड़ रुपए के चैक सौंपे
गौशालाओं के 19 करोड़ रुपए के बिजली बिल माफ करने की घोषणा
‘गोधन’ के उचित रख-रखाव के लिए पंजाब गौ सेवा आयोग की सराहना
चंडीगढ़, गौशालाओं के उचित रख-रखाव और कीमती ‘गोधन’ की देखभाल को युनिश्चित बनाने के मंतव्य से पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज राज्य की 457 पंजीकृत गौशालाओं को 5-5 लाख रुपए (कुल 23 करोड़ रुपए) के चैक सौंपने के अलावा इन गौशालाओं के 19 करोड़ रुपए के बिजली बिलों को माफ करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस सम्बन्धी नोटीफिकेशन पहले ही जारी किया जा चुका है।
इस मौके पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने वित्तीय सहायता के उचित प्रयोग करने की अपील की, जिससे बेहतर ढंग से ‘गोधन’ के प्रबंधन को सुनिश्चित बनाया जा सके। जिनका सही ढंग से प्रबंधन किया जा सकता है।
इस बात को दोहराते हुए कि गौशालाओं के लिए उनके दरवाज़े हमेशा खुले हैं, मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गौशालाओं को हमेशा साफ़-सुथरा रखा जाना चाहिए। चन्नी ने कहा, ‘‘सडक़ों पर कोई भी आवारा गाय नहीं होनी चाहिए। यदि कोई गोधन सडक़ों पर है तो उसे गौशालाओं की देख-रेख अधीन लाया जाए।’’ उन्होंने आगे कहा कि इससे हादसों की संख्या भी घटेगी।
उन्होंने ‘गऊमाता’ की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए पंजाब गौ सेवा आयोग के साथ-साथ विभिन्न गौशाला प्रबंधक समितियों की भी सराहना की।
इस मौके पर अपने संबोधन में लोक निर्माण मंत्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि गौ सेवा, पूजा का एक उत्तम रूप है और उन्होंने गोधन की उचित देख-रेख के लिए विभिन्न गौशाला प्रबंधकों की सराहना की। उन्होंने बिजली के बिलों को घटाने के लिए गौशालाओं में सोलर पैनलों का प्रयोग करने की भी वकालत की।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों संबंधी मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि सिफऱ् मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ही गौशालाओं के प्रभावशाली प्रबंधन के लिए चिंता व्यक्त की है और उन्होंने ‘गोधन’ के लिए अपार सत्कार दिखाया है।
पंजाब गौ सेवा आयोग के चेयरमैन सचिन शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा अब तक 150 ‘गौ कल्याण’ कैंप लगाए जा चुके हैं, जिससे गौमाता के स्वास्थ्य और साफ़-सफ़ाई को सुनिश्चित बनाया जा सके और गौशालाओं की उचित देख-रेख के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है।