
कहा कि उद्योगपतियों को धमकाया जा रहा है कि उनके कारखानों में कोविड-19 का केस पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी
चंडीगढ़/20अप्रैलः शिरोमणी अकाली दल ने आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा है कि वह उद्योगपतियों की आशंकाओं को दूर करें, जिन्हे धमकाया जा रहा है कि उनके कारखानों में कोविड-19 का केस पाए जाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। पार्टी ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि वह ऐसे संकेत देने बंद करें, जो पंजाब में उद्योग सैक्टर को शुरू करने में अड़चन बन रहे हैं।
यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न जिला प्रशासनों ने उद्योगपतियों से कह दिया है कि यदि उनके कारखानों में कोविड-19 का कोई केस पाया जाता है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होने कहा कि यही कारण है कि उद्योगपति अपने कारखानों को दोबारा शुरू करने का खतरा नही उठा रहे हैं।उन्होने कहा कि एक तरफ तो सरकार ने उद्योगपतियों को अपनी इकाइयां शुरू करने के लिए कह दिया है तथा दूसरी तरफ यह उद्योग विरोधी फैसले ले रही है। उन्होने कहा कि सरकार को उद्योगों को अपनी इकाइयों में सफाई संबधी सिर्फ सावधानी लेने के लिए कहना चाहिए। परंतु यदि उनके कारखानों में कोई कोविड का केस हो जाता है तो इसके लिए उद्योगपतियों को जिम्मेदार नही ठहराना चाहिए।
डॉ. चीमा ने कहा कि यदि उद्योगपतियों को महामारी के लिए जिम्मेदार ठहराने वाला निर्णय बदला न गया तो इससे राज्य में मजदूरों ने पलायन करना शुरू कर देना है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रवासी मजदूरों को राज्य में रहने का आग्रह किया है तथा उन्हे कारखानों में काम का विश्वास दिलाया है। उन्होने कहा कि परंतु सरकार अब स्वयं ही उद्योग शुरू होने के रास्ते में अड़चन डाल रही है तथा ऐसी शर्तें लगा रही है, जो राज्य के हितों का नुकसान कर रही हैं।
डॉ. चीमा ने कहा कि सिर्फ इतना ही नही चंडीगढ़ मुख्यालयों में से विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग अलग ब्यान जारी किए जा रहे हैं, जिससे भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होने कहा कि यही कारण है कि बुनियादी स्तर पर इन्हे लागू करने में कठिनाई आ रही है। उन्होने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार के पास कोई नीति ही नही है। ऐसी अनिश्चितता पंजाब का नुकसान करेगी तथा अर्थव्यवस्था को शीघ्र अपने पैरों पर खड़ा नही होने देगी। उन्होने कहा कि दूसरे राज्यों ने औद्योगिक कामकाज शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। पंजाब को इस संकट की घड़ी में उद्योग सैक्टर की तरफ सहायता वाला हाथ बढ़ाना चाहिए।





















