
*बेहाल हो रही मंडियों को लेकर भगवंत मान ने प्रधान मंत्री मोदी को लिखा पत्र, दिए सुझाव*
*कोरोना और मौसम की मार के कारण नमी की शर्तों पर मांगी छूट*
*लेबर व पल्लेदारों का मेहनताना तीन गुणा बढ़ाने पर दिया जोर*
*कूपन व्यवस्था और लिफ्टिंग फ्लाप होने के कारण बढ़ी किसानों की परेशानी और लगने लगे गेहूं के अंबार*
*चण्डीगढ़, 19 अप्रैल 2020* आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने कोरोना-वायरस, मौसम की बदमिजाजी और सरकारों के अधूरे प्रबंधों के कारण गेहूं के सीजन में बेहाल हो रही मंडियों पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी को पत्र लिखा है। अपने पत्र के द्वारा ‘आप’ संसद ने न सिर्फ किसानों, लेबर-पल्लेदारों और आढतियों की दिनों-दिन बढ़ रही परेशानी और गेहूं की आमद का हाल-ए-बयान किया है, बल्कि कई सुझाव भी दिए हैं, जिनका सीधा सम्बन्ध केंद्र सरकार के साथ है।
वीडियो कान्फ्रैंस और सोशल मीडिया के द्वारा रविवार को पत्रकारों के रूबरू होते भगवंत मान ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी लॉकडाउन और बदमिजाज मौसम पंजाब के किसान और खेती पर निर्भर सभी वर्गों पर सीधी आर्थिक चोट मार रहा हैं। इस लिए सरकारें किसानों और मजदूरों के लिए विशेष ऐलान करे।
भगवंत मान ने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन और सावधानी इस्तेमाल करते हुए वह अकेले ही अपनी कार खुद चला कर मंडियों का हाल आंखों देख रहे हैं। पंजाब सरकार की तरफ से अपनाई कूपन प्रणाली पूरी तरह फेल है। मंडियों में गेहूं लेकर आने वाले किसानों की संख्या और लिफ्टिंग (उठवाई) न होने के कारण गेहूं के अंबार बढ़ते जा रहे हैं, समय पर कदम न उठाए तो नतीजे भयानक हो सकते हैं।
भगवंत मान ने सुझाव दिया कि मंडियों में गेहूं की आमद काबू में रखने और किसानों की भीड़ न बढ़ाने के लिए गेहूं की चरणबद्ध बिक्री पर जोर दिया जाए। इस मुताबिक जो किसान पहली मई से 21 मई तक अपनी गेहूं मंडी में लेकर आऐगा उसे 100 रुपए प्रति क्विंटल और जो किसान 22 मई के बाद अपनी गेहूं मंडी लेकर आऐगा, उस एम.एस.पी पर प्रति क्विंटल 200 रुपए का बोनस ऐलान किया जाएगा। यह ऐलान मंडियों में गेहूं की एकदम आमद को रोकेगा। इसी तरह गेहूं की खरीद के लिए निर्धारित 12 प्रतिशत नमी की मात्रा में ढील दे कर इस को 14 प्रतिशत किया जाए, क्योंकि किसान कोरोना के साथ-साथ मौसम की मार भी बराबर बर्दाश्त कर रहा है।
भगवंत मान ने मंडियों में काम करती लेबर और पल्लेदारों के मेहनताना में तीन गुणा विस्तार करने की मांग रखी और बताया कि मजदूर दिनों के मुताबिक नहीं बल्कि बोरियों या तोल के हिसाब के साथ दिहाड़ी लेते हैं। यदि कोरोना के कारण मंडीकरन प्रक्रिया 15 दिनों की जगह 45 दिनों तक लटकती है तो यह मजदूर भी तीन गुणा अधिक मेहनताना लेने के हकदार हैं। इस लिए सरकार इनके बारे में तुरंत ऐलान करे।





















