
चंडीगढ़, 20 अप्रैल: पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवल्पमेंट बोर्ड के चेयरमैन पवन दीवान ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर दुनिया के अलग-अलग देशों में फंसे भारतीय पर्यटकों को भारत वापिस लाए जाने की मांग की है, जो कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन के चलते अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने बंद होने के बाद विदेशों में फंस गए हैं और अब उनके पास संसाधन भी सीमित रह गए हैं।
इस क्रम में, विदेश मंत्री को लिखे पत्र में दीवान ने कहा है कि हम समझ सकते हैं कि कोरोना वायरस से लड़ने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में लॉकडाउन लागू करने सहित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने के अलावा, हर उस कदम को उठाया गया है, जिससें भारत के लोगों को इस भयानक महामारी से बचाया जा सके। इसके लिए देश का हर नागरिक आपके साथ है और सभी राजनीतिक दलों द्वारा सरकार का समर्थन किया गया है। इसी दौरान कुछ ऐसे नागरिक भी हैं, जो लॉकडाउन से पहले विदेशों की यात्रा पर गए थे और अब वहीं फंस गए हैं। उनके पास सीमित संसाधन ही बचे हैं और वह बार-बार सरकार से भारत वापिस लाए जाने की पुकार लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा पर गए कई नागरिक, जिन्होंने 20 मार्च से अब तक देश वापिस लौटना था, भारत आने वाली अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने रद्द होने कारण विदेशों में फंस गए हैं। इस दौरान उनके साधन सीमित होने कारण उनकी हालत बहुत दयनीय हो रही है। वे बार-बार अलग-अलग देशों में स्थित भारतीय दूतावासों से उन्हें वापिस भारत भेजे जाने की पुकार लगा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में बताई जा रही है। ये वर्क वीजा व स्टडी वीजा पर सालों की योजना बनाकर गए भारतीय नागरिक नहीं हैं, जिनके तुरंत भारत वापिस लौटने की संभावना नहीं।
ऐसे में केवल पर्यटन के उद्देश्य से कुछ दिनों या सप्ताहों का कार्यक्रम बनाकर सीमित संसाधनों के साथ विदेश यात्रा पर गए इन भारतीयों को तुरंत वापिस लाया जाना चाहिए। इनकी वापिसी 20 मार्च के बाद होनी थी, जो अब केवल रेस्क्यू उड़ान के जरिए ही संभव प्रतीत होती है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानें रद्द होने से विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों ने इनकी टिकटों को रद्द कर दिया है और एयरलाइंस कंपनियों के कार्यालय भी बंद कर दिए गए हैं। इन यात्रियों के आर्थिक हालातों के साथ-साथ सेहत सुविधाओं की कमी से इनकी मानसिक स्थिति भी डांवाडोल हो रही है और उन्हें भविष्य में वापिसी का कहीं से भी आश्वासन नहीं मिल रहा।
इसके विपरीत दुनिया के अलग-अलग कोरोना प्रभावित देशों अमेरिका, कनाडा, यूके, फ्रांस, स्पेन, इटली, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड की सरकारों द्वारा निरंतर भारत से अपने नागरिकों को अप्रैल माह में रेस्क्यू किया जा रहा है। वहीं पर, भारत सरकार द्वारा अपने हाई कमिशन के कार्यालयों व दूतावासों से देश लौटने के चाहवान नागरिकों की सूची एकत्रित की जा सकती है। ये भारतीय नागरिक सरकार द्वारा लिए जाने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
अंत में दीवान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आप इन यात्रियों के हालातों को समझेंगे और इन्हें भारत वापिस लाने का प्रबंध करेंगे। इसी तरह, जब तक इन्हें वापिस नहीं लाया जाता, संबंधित देश में स्थित भारतीय दूतावासों को इन्हें सहायता प्रदान करने के निर्देश देंगे।






















