
*👉सरकारों की नालायकी के कारण 20 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज उठाने के लिए मजबूर हैं खेत मजदूर*
*👉🏿कर्ज के निपटारो के लिए ‘आप’ लाएगी ठोस नीती*
*चंडीगढ़, 14 जुलाई -आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सीनियर नेता व नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने खेत मजदूरों पर पिछले 30 वर्षों में 61 प्रतिशत कर्ज बढ़ जाने के लिए अकाली-भाजपा और कांग्रेस की केंद्र और प्रदेश सरकारों की लोक विरोधी नीतियां और बेईमान नियतों को जिम्मेदार बताया है।
पार्टी हैडक्वाटर से जारी बयान के द्वारा हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल (बादल) और भाजपा ने किसानों और भूमिहीन गरीबों-खेत मजदूरों को वोटों के लिए ही इस्तेमाल किया है, परंतु किए चुनावी वायदे कभी भी नहीं पूरे किए।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह अपने 562 चुनावी वायदों में से 328 पूरी तरह और 97 काफी हद तक पूरे कर लेने के झूठे और फरेबी दावे कर पंजाब के किसानों और भूमिहीन दलित-मजदूरों समेत सभी वर्गों के जख्मों पर नमक छिडक़ रहे हैं।
चीमा ने पूछा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह स्पष्ट करें कि भूमिहीन दलितों और खेत मजदूरों के कितने कर्जे माफ किए हैं? चीमा मुताबिक यदि कैप्टन अमरिन्दर सिंह अपने चुनावी वायदों के प्रति थोड़ा-बहुत भी संजीदा रहते तो खेत मजदूरों को 20 प्रतिशत से भी अधिक ब्याज दर पर कर्जे उठाने की नौबत न आती।
हरपाल सिंह चीमा ने माहिरों द्वारा किए अध्ययन के हवाले से कहा कि कर्ज के बोझ के कारण जहां किसान आत्महत्याएं करने के लिए मजबूर हैं, वहीं खेत मजदूर भी बड़ी संख्या में आत्महत्याएं कर रहे हैं। चीमा ने बताया कि ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 से 2018 तक 7300 खेत मजदूरों ने आत्म हत्याएं की हैं, जिनमें 5765 का एक मात्र कारण कर्ज का बोझ रहा है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि सरकारों की नीतियां कृषि और खेत मजदूर समर्थकी होती तो भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए भी कम ब्याज वाले कर्जों का संस्थागत बंदोबस्त होता, परंतु सरकारों ने इस तरफ कभी भी ध्यान नहीं दिया नतीजे के तौर पर खेत मजदूरों को 20.6 प्रतिशत की बेहद महंगी ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ रहा है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि 2022 में पंजाब के लोग आम आदमी पार्टी को मौका देते हैं, तो किसानों और खेत-मजदूरों के कर्जे का पहल के आधार पर तर्कसंगत निपटारा करने के लिए एक पारदर्शी और प्रभावशाली नीति लाई जाएगी।






















