आई. आई. टी रोपड़ द्वारा मैंडरिन (चीनी) भाषा प्रोग्राम की शुरूआत

रूपनगर, 27 सितम्बर( विश्ववार्ता )सभी इच्छुक विद्यार्थियों और ट्राईसिटी के निवासियों के लिए अच्छी खबर है कि आई. आई. टी रोपड़ मैंडरिन भाषा (चीनी भाषा) में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है। आई. आई. टी रोपड़ ने भारत और ताइवान दरमियान शिक्षा और संस्कृतिक संबंधों को उत्साहित करने के लिए अपने कैंपस में ताइवान शिक्षा केंद्र की शुरूआत की है। आई. आई. टी रोपड़ ने भारत और ताइवान दरमियान शिक्षा और संस्कृतिक संबंधों को उत्साहित करने के लिए अपने कैंपस में ताइवान शिक्षा केंद्र की शुरूआत की है। यह केंद्र ताइवान और भारत की उच्च शैक्षिक संस्थाओं दरमियान बेहतर समझ और सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय विद्यार्थियों और फेकल्टी में मैंडरिन (चीनी) भाषा को भी उत्साहित करेगा। इस समझौते पर आज दस्तखत किये गए हैं, जिस में ताइवान से पहुंचे वफद में माननीय राजदूत श्री बाऊशूआन गेर, शिक्षा विभाग के डायरैक्टर श्री पीटरस चेन, शिक्षा मंत्रालय, ताइवान, विज्ञान और प्रौद्यौगिकी मंत्रालय ताइवान के डायरैक्टर चिह्न सान, विज्ञान और प्रौद्यौगिकी मंत्रालय ताइवान, मिस ऐली च्यांग, विज्ञान और प्रौद्यौगिकी डिवीजन के सहायक डायरैक्टर ताइवान और श्री चार्ल्स चेंग समेत ताइवान विदेस मंत्रालय के टीईसीसी के सचिव और आई. आई. टी रोपड़ के डायरैक्टर प्रोफैसर राजीव आहूजा, और डीन इंटरनैशनल रिलेशनज डा. सी. सी. रैडी शामिल थे।
आई. आई. टी रोपड़ में ताइवान शिक्षा केंद्र हर किसी के लिए शुरूआती मैंडरिन भाषा पाठ्यक्रमों की पेशकश करने जा रहा है (चाहे यदि आप आई. आई. टी रोपड़ के विद्यार्थी नहीं हो तो भी आप इस पाठ्यक्रम के लिए अप्लाई कर सकते हो)। यह पाठ्यक्रम ताइवान ऐजूकेशन सैंटर और आफिस आफ इंटरनैशनल रिलेशनज की तरफ से इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी रोपड़ में आयोजित किये जाएंगे।
यह प्रोगराम ताइपे इक्नामिक एंड कल्चरल सैंटर (टी. ई. सी. था) के सहयोग के साथ किया जाता है। भारत में ताइपे आर्थिक और संस्कृतिक केंद्र (टी. ई. सी. सी) भारत में ताइवान सरकार का प्रतिनिधि दफ्तर है। यह अर्थव्यवसथा, व्यापार, निवेश, मीडिया, सैर -सपाटा, सभ्याचार, शिक्षा और विज्ञान और प्रौद्यौगिकी के क्षेत्रों में ताइवान और भारत के दुतरफे संबंधों को उत्साहित करने के लिए जिम्मेदार है।
इस सम्बन्धित जानकारी देते हुए आई. आई. टी रोपड़ के डायरैक्टर ने कहा कि आज हम जिस संसार में रहते हैं वह पहले की अपेक्षा और ज्यादा आपस में जुड़ा हुआ है और भाषा एक देश के सभ्याचार को समझने के लिए सांझा माध्यम है। ताइवान में अकादमिक, खोज और प्लेसमेंट मौके दोनों के मामलो में उभर रहे हैं। ताइवान की यूनिवर्सिटियाँ हमारे इंस्टीट्यूट के साथ सहयोग करने का इन्तजार कर रही हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ती गतीशीलता भविष्य में हमारे विद्यार्थियों के लिए बहुत से अवसर पैदा करेगी। संस्था के कुछ विद्यार्थियों ने पहले ही भाषा सीखने में गहरी रूचि दिखाई है। हम भाषा में पाठ्यक्रम की पेशकश करन का फैसला किया है।
आई. आई. टी रोपड़ के इंटरनेशनल रिलेशनज के डीन डा. सी. सी. रैडी ने कहा कि विद्यार्थियों को मैंडरिन भाषा में प्रशिक्षण दिया जायेगा और इस लिए वह भारत और विदेशों में स्थापित ताइवानी कंपनियों में काम करने के योग्य होंगे। यह भाषा हुनर तकनीकी ज्ञान के इलावा एक संपत्ति होंगे और उनको ग्लोबल नेता बनने में मदद करेंगे।
ताइवान के माननीय राजदूत श्री बाऊशूआन गिरा ने कहा कि आज का समझौता भारत और ताइवान दरमियान नजदीकी अकादमिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मील पत्थर निर्धारित करता है। उन्होंने कहा कि आई. आई. टी रोपड़ जैसी भारतीय संस्थायों के साथ अकादमिक सम्बन्ध विकसित करना हमारे दुतरफे संबंधों की स्थापना और मजबूती के लिए महत्वपूर्ण रहा है। जब हमारी लोकतंत्रीय कदरों -कीमतों और नीतियों की बात आती है तो ताइवान और भारत दिमागी हिस्सेदार हैं। भारत की ऐन. ई. पी (राशटरी शैक्षिक नीति) और ताइवान की नयी दक्षिण की तरफ वृक्ष करन वाली नीति इस बात का सबूत है कि हमारे भविष्य के लक्ष्य एकसार हैं। इस समझौतो के साथ हम अपने राशटरों के शैक्षिक समाज को जोड़ने और दोनों धड़ो के विद्वानों और विद्यार्थियों को भाशावों के विे पर सहयोग करन, बातचीत करन और आदान -प्रदान प्रोगरामों और भविष्य में आपसी रूचि का मौका देने की उम्मीद करते हैं।
बाद में टीम ने आई. आई. टी रोपड़ द्वारा आयोजित ताइवान ए. आई. सैंटर का भी दौरा किया और श्री बाऊशूआन गिरा ने निरदेशक प्रो. राजीव आहूजा के साथ आईी आई. टी रोपड़ में ताइवान शिक्षा केंद्र का उद्घाटन किया। अंत में टीम ने आई. आई. टी रोपड़ में डी. एस. टी की तरफ से स्पांसर की पहल कदमी अवध (कृषि और जल प्रौद्यौगिकी विकास केंद्र) का दौरा किया।





















