
*👉‘आप’ विधायकों ने डीजल-पैट्रोल की कीमतों के संदर्भ में बादलों और कैप्टन की ब्यानबाजी सिर्फ नाटक*
*चण्डीगढ़, 4 जुलाई -आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने कृषि क्षेत्र को राहत देने के लिए डीजल पर टैकस कम करने की तत्काल मांग रखी है।
पार्टी हैडक्वाटर से जारी बयान के द्वारा पार्टी के किसान विंग के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक कुलतार सिंह संधवां, विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर व जै कृष्ण सिंह रोड़ी ने कहा कि भयानक गर्मी, आघोषित बिजली कट और बारिश की कमी ने पहले ही विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे किसानों की मुश्किलें ओर बडा दी हैं। इस लिए केंद्र व प्रदेश सरकारें अंनदाता की मदद करें, डीजल पर केंद्रीय और प्रांतीय टैकस कम करें और नहरी पानी और निर्विघ्न बिजली की सप्लाई यकीनी बनाएं।
कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि देश के लोग बेकाबू महंगाई की मार झेल रहे हैं और कोरोना महामारी ने महंगाई और वित्तीय संकट को ओर बडा दिया। दुनिया भर की सरकारें जहां अपने नागरिकों को इस गंभीर वित्तीय संकट से उभारने के लिए जहां बड़े-बड़े राहत पैकेज ऐलान कर रही है, वहीं महंगाई को काबू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिरी कीमतों के अनुसार पैट्रोलियम पदार्थों की कीमतें घटा रही हैं, परंतु हमारी केंद्र और पंजाब सरकार डीजल-पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ौतरी कर रही हैं। जो लोक विरोधी, देश विरोधी और निंदनीय कदम है।
जै कृष्ण सिंह रोड़ी और मनजीत सिंह बिलासपुर ने मांग की है कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के हितों के मद्देनजर डीजल पर अपने-अपने टैकस घटाएं जो असल कीमत पर 60 से 70 प्रतिशत अधिक बनते हैं।
संधवां समेत ‘आप’ विधायकों ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, सुखबीर सिंह बादल और मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से डीजल पेट्रोल की कीमतों के बारे में की जा रही ब्यानबाजी को केवल नाटक करार देते हुए कहा कि जहां हरसिमरत कौर बादल को अपनी वजीरी की फिक्र किए बिना मोदी सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोलना चाहिए। वहीं कैप्टन अमरिन्दर सिंह को भी डीजल पर प्रदेश के हिस्से का वैट (टैकस) घटा कर किसानों को राहत देनी चाहिए। ’आप’ विधायकों ने मांग की है कि कैप्टन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र के लिए बिजली सप्लाई में आघोषित बिजली कट बंद करे और सिंचाई के लिए नहरी पानी की सप्लाई अंत तक यकीनी बनाए, जिससे किसानों को डीजल जला कर फसलें, सब्जियां और बागबानी की देखरेख करने की जरूरत ही न पड़े।




















